बुधवार, 6 नवंबर 2013
मंगलवार, 5 नवंबर 2013
हिंदी साहित्य पहेली 107 पहचानिये इस प्रसिद्ध कथा को?
प्रिय पाठकजन एवं चिट्ठाकारों,
- यह कथा आख्यान आर्यों के प्रसिद्ध प्राचीन दंतकथाओं में से एक है .
- यह उदात्त और अमर प्रेम की आदि कथा है .
- यह कथा महाभारत में भी (महाभारत, वनपर्व , अध्याय 53 से 78 तक) वर्णित है .
- यह इतनी सुन्दर,सरस और मनोहर है कि कई विद्वान् इसे महर्षि वेद व्यास रचित मानते हैं .
- इस कथा पर राजा रवि वर्मा के साथ ही अनेक चित्रकारों ने अपने चित्र/तैलचित्र बनाये हैं .
- यह अमर कथा अपनी नाट्य प्रस्तुतियों से कितनी बार ही मंचों को सुशोभित कर गयी है .
- 1945 में इस कथा पर फिल्म बनी थी ....
- मुज़फ्फर अली ने इस कथा पर टीवी सीरिअल भी निर्देशित किया था
इस पहेली में हल हेतु कोई संकेत नहीं,
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
मंगलवार, 29 अक्टूबर 2013
हिन्दी साहित्य पहेली 106 के परिणाम विजेता सुश्री शारदा सुमन जी
प्रिय पाठकजन एवं चिट्ठाकारों,
इस पहेली का परिणाम
इस पहेली के कई उत्तर हमें प्राप्त हुये जो सही थे सबसे पहले प्राप्त होने वाला उत्तर सुश्री शारदा सुमन जी जी का रहा अतः आज के विजेता पद को सुशोभित करने का अधिकार जाता है सुश्री शारदा सुमन जी को ।
2- और आज की पहेली में सही उत्तर भेजकर उपविजेता हैं श्री सुनील झा जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)
3- और आज की पहेली में सही उत्तर भेजकर उपविजेता हैं श्री प्रकाश गोविन्द जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)
4-इस बार सही उत्तर भेजकर विजेता बनी हैं सुश्री साधना वैद्य जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)

आज की पहेली का सही उत्तर खोज कर साहित्य पहेली को प्रेषित कर इसमें सक्रिय भाग लेने के लिये हार्दिक आभार और शुभकामनाये

इस पहेली का परिणाम
हिंदी साहित्य पहेली 106 विश्व प्रसिद्ध पत्र के लेखक को पहचानना था
यह ऐतिहासिक पत्र जवाहर लाल नेहरू ने अंग्रेजी भाषा में अपनी पुत्री इन्दिरा जी को लिखे थे जिनका हिन्दी अनुवाद प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रेमचंद ने किया था।
जवाहर लाल नेहरू से संबंधित अन्य जानकारी गद्यकोश पर
इस पहेली के कई उत्तर हमें प्राप्त हुये जो सही थे सबसे पहले प्राप्त होने वाला उत्तर सुश्री शारदा सुमन जी जी का रहा अतः आज के विजेता पद को सुशोभित करने का अधिकार जाता है सुश्री शारदा सुमन जी को ।
और अब चर्चा इस पहेली के परिणाम पर
1-इस बार सही उत्तर भेजकर विजेता बनी हैं सुश्री शारदा सुमन जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)
2- और आज की पहेली में सही उत्तर भेजकर उपविजेता हैं श्री सुनील झा जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)
3- और आज की पहेली में सही उत्तर भेजकर उपविजेता हैं श्री प्रकाश गोविन्द जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)
4-इस बार सही उत्तर भेजकर विजेता बनी हैं सुश्री साधना वैद्य जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)

आज की पहेली का सही उत्तर खोज कर साहित्य पहेली को प्रेषित कर इसमें सक्रिय भाग लेने के लिये हार्दिक आभार और शुभकामनाये
एक विशेष बात
पहेली के नये नियमों के अधीन इस बार विजेता नये सिरे से घोषित किया जायेगा । माह अक्टूबर 2013 में पूछी गयी सभी पहेलियों के आधार पर मासिक विजेता का परिणाम जानने के लिये दिनांक 10 नवम्बर 2013 को हिन्दी साहित्य पहेली पढना मत भूलियेगा

सोमवार, 28 अक्टूबर 2013
हिंदी साहित्य पहेली 106 विश्व प्रसिद्ध पत्र के लेखक को पहचानना है
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकार मित्रों,
............तुम इतिहास किताबों में ही पढ़ सकती हो। लेकिन पुराने जमाने में तो आदमी पैदा ही न हुआ था; किताबें कौन लिखता? तब हमें उस जमाने की बातें कैसे मालूम हों? यह तो नहीं हो सकता कि हम बैठे-बैठे हर एक बात सोच निकालें। यह बड़े मजे की बात होती, क्योंकि हम जो चीज चाहते सोच लेते, और सुंदर परियों की कहानियाँ गढ़ लेते। लेकिन जो कहानी किसी बात को देखे बिना ही गढ़ ली जाए वह ठीक कैसे हो सकती है? लेकिन खुशी की बात है कि उस पुराने जमाने की लिखी हुई किताबें न होने पर भी कुछ ऐसी चीजें हैं जिनसे हमें उतनी ही बातें मालूम होती हैं जितनी किसी किताब से होतीं। ये पहाड़, समुद्र, सितारे, नदियाँ, जंगल, जानवरों की पुरानी हड्डियाँ और इसी तरह की और भी कितनी ही चीजें हैं जिनसे हमें दुनिया का पुराना हाल मालूम हो सकता है। मगर हाल जानने का असली तरीका यह नहीं है कि हम केवल दूसरों की लिखी हुई किताबें पढ़ लें, बल्कि खुद संसार-रूपी पुस्तक को पढ़ें। मुझे आशा है कि पत्थरों और पहाड़ों को पढ़ कर तुम थोड़े ही दिनों में उनका हाल जानना सीख जाओगी। सोचो, कितनी मजे की बात है। एक छोटा-सा रोड़ा जिसे तुम सड़क पर या पहाड़ के नीचे पड़ा हुआ देखती हो, शायद संसार की पुस्तक का छोटा-सा पृष्ठ हो, शायद उससे तुम्हें कोई नई बात मालूम हो जाय। शर्त यही है कि तुम्हें उसे पढ़ना आता हो। कोई जबान, उर्दू, हिंदी या अंग्रेजी, सीखने के लिए तुम्हें उसके अक्षर सीखने होते हैं। इसी तरह पहले तुम्हें प्रकृति के अक्षर पढ़ने पड़ेंगे, तभी तुम उसकी कहानी उसकी पत्थरों और चट्टानों की किताब से पढ़ सकोगी। शायद अब भी तुम उसे थोड़ा-थोड़ा पढ़ना जानती हो। जब तुम कोई छोटा-सा गोल चमकीला रोड़ा देखती हो, तो क्या वह तुम्हें कुछ नहीं बतलाता? यह कैसे गोल, चिकना और चमकीला हो गया और उसके खुरदरे किनारे या कोने क्या हुए? अगर तुम किसी बड़ी चट्टान को तोड़ कर टुकड़े-टुकड़े कर डालो तो हर एक टुकड़ा खुरदरा और नोकीला होगा। यह गोल चिकने रोड़े की तरह बिल्कुल नहीं होता। फिर यह रोड़ा कैसे इतना चमकीला, चिकना और गोल हो गया? अगर तुम्हारी ऑंखें देखें और कान सुनें तो तुम उसी के मुँह से उसकी कहानी सुन सकती हो। वह तुमसे कहेगा कि एक समय, जिसे शायद बहुत दिन गुजरे हों, वह भी एक चट्टान का टुकड़ा था। ठीक उसी टुकड़े की तरह, उसमें किनारे और कोने थे, जिसे तुम बड़ी चट्टान से तोड़ती हो। शायद वह किसी पहाड़ के दामन में पड़ा रहा। तब पानी आया और उसे बहा कर छोटी घाटी तक ले गया। वहाँ से एक पहाड़ी नाले ने ढकेल कर उसे एक छोटे-से दरिया में पहुँचा दिया। इस छोटे से दरिया से वह बड़े दरिया में पहुँचा। इस बीच वह दरिया के पेंदे में लुढ़कता रहा, उसके किनारे घिस गए और वह चिकना और चमकदार हो गया। इस तरह वह कंकड़ बना जो तुम्हारे सामने है। किसी वजह से दरिया उसे छोड़ गया और तुम उसे पा गईं। अगर दरिया उसे और आगे ले जाता तो वह छोटा होते-होते अंत में बालू का एक जर्रा हो जाता और समुद्र के किनारे अपने भाइयों से जा मिलता, जहाँ एक सुंदर बालू का किनारा बन जाता, जिस पर छोटे-छोटे बच्चे खेलते और बालू के घरौंदे बनाते।
अगर एक छोटा-सा रोड़ा तुम्हें इतनी बातें बता सकता है, तो पहाड़ों और दूसरी चीजों से, जो हमारे चारों तरफ हैं, हमें और कितनी बातें मालूम हो सकती हैं।........
इस पहेली में हल हेतु कोई संकेत नहीं,
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
मंगलवार, 22 अक्टूबर 2013
हिन्दी साहित्य पहेली 105 का सही उत्तर
प्रिय पाठकजन एवं चिट्ठाकारों,
इस पहेली का परिणाम
हिन्दी साहित्य पहेली 105 का सही उत्तर है
इस पहेली का परिणाम
हिन्दी साहित्य पहेली 105 का सही उत्तर है
गुलज़ार
और इस पहेली के विजेता हैं ...
हिन्दी साहित्य पहेली 105 में 10 अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागी हैं।
हिन्दी साहित्य पहेली 105 में 10 अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागी हैं।
1आदरणीय सुश्री शारदा सुमन जी
2आदरणीया सुश्री साधना वेद्य जी
3आदरणीय श्री प्रकाश गोविन्द जी
माह अक्टूबर अब तक के विजेता हेतु कुल अंक4आदरणीय श्री राणा प्रताप सिंह जी
1आदरणीय श्री यशवन्त यश जी जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 10)
2आदरणीय सुश्री शारदा सुमन जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 20)
3आदरणीय सुश्री विभारानी श्रीवास्तव (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 5)
4आदरणीया सुश्री साधना वेद्य जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 10)
5आदरणीय श्री श्री प्रकाश गोविन्द जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 5)
6आदरणीय श्री राणा प्रताप सिंह जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 10)
5आदरणीय श्री श्री प्रकाश गोविन्द जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 5)
6आदरणीय श्री राणा प्रताप सिंह जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 10)
मासिक विजेता निर्धारण के नये प्रारूप के विजेता प्रत्याशियों को आगामी पहेलियों के लिये अग्रिम हिंदी साहित्य पहेली परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनायें
सोमवार, 21 अक्टूबर 2013
हिन्दी साहित्य की पहेली 105 पहचानिये इस प्रसिद्ध शायर को?
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकार मित्रों,
इस प्रसिद्ध शायर का नाम आज सफलता की उस बलंदी के लिए जाना जाता है जहाँ तक जाने के लिए हर कोई बेताब खड़ा है।
यह प्रसिद्ध शायर उन चंद नामी शायरों में से एक हैं जिन्होंने अपने गीतों, नज़्मों और कहानियों के लिए ख़्याति पायी। कुछ आगे ज़िक्र करूँ इससे पहले बताना चाहूँगा आज लगभग हर हिन्दी स्कूल में करायी जाने वाली प्रार्थना हम को मन की शक्ति देना दाता, मन विजय करें यह प्रसिद्ध शायर का लिखा एक गीत है जो फ़िल्म गुड्डी से है। बच्चों के लिए लिखी गयी रचनाएँ जितनी यह प्रसिद्ध शायर की सबकी ज़बाँ पर चढ़ीं शायद ही और कोई इतनी सरलता से हर नन्हें दिल में अपनी जगह बना पाया हो। अगर हम बात करें इस प्रसिद्ध शायर द्वारा लिखे बाल-गीतों की तो सबसे पहले जंगल बुक का टायटल गीत
जंगल-जंगल बात चली पता चला है, चड्ढी पहन के फूल खिला है फूल खिला है याद आता है,
और भी हैं जैसे एलिस इन वन्डर लैण्ड का टिप-टिप टोपी-टोपी,
काबुली वाला का आया झुन्नू वाला बाबा और अन्य कई फ़िल्मी गीत जैसे फ़िल्म मकड़ी का ए पापड़वाले पंगा न ले।
इस प्रसिद्ध शायर ने जब फ़िल्मी दुनिया में अपना स्थान बनाना चाहा तो उन्हें मौक़ा मिला बिमल राय जैसे महान फ़िल्मकार के साथ काम करने का, जिनसे उन्होंने निर्देशन का काम भली तरह समझा। फिर कोमल, सफल और सार्थक गीत लिखे, उनका हाथ यहीं तक सीमित नहीं रहा, आपने कई फ़िल्मों के लिए कथाएँ, पटकथाएँ और संवाद भी लिखे। जब फ़िल्म निर्देशन में उतरे तो ऐसी संवेदनशील, मार्मिम और हृदयस्पर्शी फ़िल्मों का निर्माण किया जिन्होंने फ़िल्म जगत में एक आन्दोलन ला दिया कि फ़िल्में सिर्फ़ चटपटी नहीं सादे-साधारण लोगों के जीवन पर आधारित भी हो सकती हैं और फ़िल्म देखने वालों के दिल में अपना नाम दर्ज़ करा सकने में गुल्ज़ार सफल होते चले गये और बस सफलता उनके पंख बन गयी जो कभी कटे नहीं और आज भी आकाश में दूर तक उड़ने को सदा तत्पर हैं।
कुछ फ़िल्मों के नाम हैं जो सदा याद की जाती है और याद रखी जायेंगी, मेरे अपने, अचानक, परिचय, आँधी, मौसम, ख़ुशबू, मीरा, किनारा, नमकीन, लेकिन, लिबास, माचिस, इत्यादि।
इस प्रसिद्ध शायर का नाम आज सफलता की उस बलंदी के लिए जाना जाता है जहाँ तक जाने के लिए हर कोई बेताब खड़ा है।
यह प्रसिद्ध शायर उन चंद नामी शायरों में से एक हैं जिन्होंने अपने गीतों, नज़्मों और कहानियों के लिए ख़्याति पायी। कुछ आगे ज़िक्र करूँ इससे पहले बताना चाहूँगा आज लगभग हर हिन्दी स्कूल में करायी जाने वाली प्रार्थना हम को मन की शक्ति देना दाता, मन विजय करें यह प्रसिद्ध शायर का लिखा एक गीत है जो फ़िल्म गुड्डी से है। बच्चों के लिए लिखी गयी रचनाएँ जितनी यह प्रसिद्ध शायर की सबकी ज़बाँ पर चढ़ीं शायद ही और कोई इतनी सरलता से हर नन्हें दिल में अपनी जगह बना पाया हो। अगर हम बात करें इस प्रसिद्ध शायर द्वारा लिखे बाल-गीतों की तो सबसे पहले जंगल बुक का टायटल गीत
जंगल-जंगल बात चली पता चला है, चड्ढी पहन के फूल खिला है फूल खिला है याद आता है,
और भी हैं जैसे एलिस इन वन्डर लैण्ड का टिप-टिप टोपी-टोपी,
काबुली वाला का आया झुन्नू वाला बाबा और अन्य कई फ़िल्मी गीत जैसे फ़िल्म मकड़ी का ए पापड़वाले पंगा न ले।
इस प्रसिद्ध शायर ने जब फ़िल्मी दुनिया में अपना स्थान बनाना चाहा तो उन्हें मौक़ा मिला बिमल राय जैसे महान फ़िल्मकार के साथ काम करने का, जिनसे उन्होंने निर्देशन का काम भली तरह समझा। फिर कोमल, सफल और सार्थक गीत लिखे, उनका हाथ यहीं तक सीमित नहीं रहा, आपने कई फ़िल्मों के लिए कथाएँ, पटकथाएँ और संवाद भी लिखे। जब फ़िल्म निर्देशन में उतरे तो ऐसी संवेदनशील, मार्मिम और हृदयस्पर्शी फ़िल्मों का निर्माण किया जिन्होंने फ़िल्म जगत में एक आन्दोलन ला दिया कि फ़िल्में सिर्फ़ चटपटी नहीं सादे-साधारण लोगों के जीवन पर आधारित भी हो सकती हैं और फ़िल्म देखने वालों के दिल में अपना नाम दर्ज़ करा सकने में गुल्ज़ार सफल होते चले गये और बस सफलता उनके पंख बन गयी जो कभी कटे नहीं और आज भी आकाश में दूर तक उड़ने को सदा तत्पर हैं।
कुछ फ़िल्मों के नाम हैं जो सदा याद की जाती है और याद रखी जायेंगी, मेरे अपने, अचानक, परिचय, आँधी, मौसम, ख़ुशबू, मीरा, किनारा, नमकीन, लेकिन, लिबास, माचिस, इत्यादि।
इस पहेली में हल हेतु कोई संकेत नहीं,
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
मंगलवार, 15 अक्टूबर 2013
हिन्दी साहित्य पहेली 104 के परिणाम
प्रिय पाठकजन एवं चिट्ठाकारों,
इस पहेली का परिणाम
हिन्दी साहित्य पहेली 104 यह भारतीय किताब 'पंचतंत्र' की है !
पंचतंत्र की कथाओं से संबंधित अन्य जानकारी गद्यकोश पर
2- और आज की पहेली में उत्तर भेजकर प्रतिभाग करने के लिये सराहनीय प्रतिभागी रही हैं
सुश्री vibha rani Shrivastava जी
3-नोट .सुश्री शारदा सुमनजी https://www.facebook.com/sharda.suman.5का उत्तर पहेली का परिणाम प्रकाशित होने के बाद प्राप्त हुआ है
इस लिये उनका नाम विजेताओ की सूची में नहीं सम्मिलित किया जा सका
आज की पहेली का सही उत्तर खोज कर साहित्य पहेली को प्रेषित कर इसमें सक्रिय भाग लेने के लिये हार्दिक आभार और शुभकामनाये

इस पहेली का परिणाम
हिन्दी साहित्य पहेली 104 यह भारतीय किताब 'पंचतंत्र' की है !
एक बार पंचतंत्र के रचयिता विष्णु शर्मा बच्चों के साथ खेल रहे थे। उन्हें बच्चों के साथ खेलने में बड़ा आनंद मिलता था। उनके साथ खेलते समय वह हर तरह की समस्या व परेशानी को भूल जाते थे। तभी उनका एक मित्र वहां आ पहुंचा। विष्णु शर्मा को बच्चों के साथ खेलते देखकर वह बोला,'पंडित जी, आप इतने महान विद्वान होकर भी बच्चों के बीच खेल रहे हैं? क्या आपको यह शोभा देता है? मुझे आप जैसे विद्वान को बच्चों के साथ खेलते देखकर अत्यंत अचरज हो रहा है।'यह सुनकर विष्णु शर्मा बोले,'क्यों, इसमें अचरज की क्या बात है? खेलने से दिमाग स्वस्थ रहता है। खेल के माध्यम से व्यक्ति अपनी पीड़ा और दुख को भूल जाता है।'इस पर उनके मित्र बोले, 'पर आप तो बड़े लेखक हैं । खेलने से आपका अमूल्य समय नष्ट नहीं होता? आप यह सोचिए न कि जितनी देर आप बच्चों के साथ खेल रहे हैं, उतनी ही देर में किसी अच्छी रचना का सृजन कर सकते हैं।'मित्र की बात पर विष्णु शर्मा मुस्कराने लगे और मित्र से बोले, 'तुम लेखक नहीं हो न, इसलिए इस तरह की बातें कर रहे हो वरना तुम ऐसा कभी नहीं कहते।शायद तुम नहीं जानते कि बच्चों के साथ खेल कर, उनके बीच रहकर ही मैं उनके हाव-भाव को कुशलता से समझ कर अपनी रचना में उतार पाता हूं। बच्चों को जाने-समझे बिना भला उनके बारे में लिखना कैसे संभव है? अब तुम्हीं बताओ कि यदि तुम्हारा खाना खाने का मन हो और तुम्हें खाना बनाना न आता हो तो क्या तुम अच्छा खाना बना पाओगे?'मित्र बोला, 'नहीं पंडित जी, मैं आपकी बात का अर्थ समझ गया। आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। बच्चों के लिए लिखने से पहले वाकई उनके भाव और कल्पनाओं का ज्ञान जरूरी है।'यह कहकर उनका मित्र चला गया और विष्णु शर्मा फिर से बच्चों के साथ खेलने में रम गए।
यह ऐतिहासिक कृति 'पंचतंत्र' के फारसी अनुवाद संबंधित अन्य जानकारी आप गद्यकोश के इस लिंक पर जाकर पा सकते हैं ।
पंचतंत्र की कथाओं से संबंधित अन्य जानकारी गद्यकोश पर
2- और आज की पहेली में उत्तर भेजकर प्रतिभाग करने के लिये सराहनीय प्रतिभागी रही हैं
सुश्री vibha rani Shrivastava जी
3-नोट .सुश्री शारदा सुमनजी https://www.facebook.com/sharda.suman.5का उत्तर पहेली का परिणाम प्रकाशित होने के बाद प्राप्त हुआ है
इस लिये उनका नाम विजेताओ की सूची में नहीं सम्मिलित किया जा सका
आज की पहेली का सही उत्तर खोज कर साहित्य पहेली को प्रेषित कर इसमें सक्रिय भाग लेने के लिये हार्दिक आभार और शुभकामनाये

सोमवार, 14 अक्टूबर 2013
हिन्दी साहित्य की पहेली 104 प्रसिद्ध लेखक पहचानिये
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
बच्चों के लिये अनुपम साहित्य लिखने वाले एक प्रसिद्ध लेखक एक बार बच्चों के साथ खेल रहे थे। उन्हें बच्चों के साथ खेलने में बड़ा आनंद मिलता था। उनके साथ खेलते समय वह हर तरह की समस्या व परेशानी को भूल जाते थे। तभी उनका एक मित्र वहां आ पहुंचा। लेखक को बच्चों के साथ खेलते देखकर वह बोला,
इस पहेली में हल हेतु कोई संकेत नहीं,
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
पहचानिये कि बच्चों के लिये अनुपम साहित्य लिखने वाले कौन से प्रसिद्ध लेखक से जुडा प्रेरक प्रसंग हो सकता है यह?
बच्चों के लिये अनुपम साहित्य लिखने वाले एक प्रसिद्ध लेखक एक बार बच्चों के साथ खेल रहे थे। उन्हें बच्चों के साथ खेलने में बड़ा आनंद मिलता था। उनके साथ खेलते समय वह हर तरह की समस्या व परेशानी को भूल जाते थे। तभी उनका एक मित्र वहां आ पहुंचा। लेखक को बच्चों के साथ खेलते देखकर वह बोला,
'पंडित जी, आप इतने महान विद्वान होकर भी बच्चों के बीच खेल रहे हैं? क्या आपको यह शोभा देता है? मुझे आप जैसे विद्वान को बच्चों के साथ खेलते देखकर अत्यंत अचरज हो रहा है।'
यह सुनकर लेखक बोले,
'क्यों, इसमें अचरज की क्या बात है? खेलने से दिमाग स्वस्थ रहता है। खेल के माध्यम से व्यक्ति अपनी पीड़ा और दुख को भूल जाता है।'
इस पर उनके मित्र बोले,
'पर आप तो बड़े लेखक हैं । खेलने से आपका अमूल्य समय नष्ट नहीं होता? आप यह सोचिए न कि जितनी देर आप बच्चों के साथ खेल रहे हैं, उतनी ही देर में किसी अच्छी रचना का सृजन कर सकते हैं।'
मित्र की बात पर लेखक मुस्कराने लगे और मित्र से बोले,
'तुम लेखक नहीं हो न, इसलिए इस तरह की बातें कर रहे हो वरना तुम ऐसा कभी नहीं कहते। शायद तुम नहीं जानते कि बच्चों के साथ खेल कर, उनके बीच रहकर ही मैं उनके हाव-भाव को कुशलता से समझ कर अपनी रचना में उतार पाता हूं। बच्चों को जाने-समझे बिना भला उनके बारे में लिखना कैसे संभव है? अब तुम्हीं बताओ कि यदि तुम्हारा खाना खाने का मन हो और तुम्हें खाना बनाना न आता हो तो क्या तुम अच्छा खाना बना पाओगे?'
मित्र बोला,
'नहीं पंडित जी, मैं आपकी बात का अर्थ समझ गया। आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। बच्चों के लिए लिखने से पहले वाकई उनके भाव और कल्पनाओं का ज्ञान जरूरी है।'
यह कहकर उनका मित्र चला गया और लेखक फिर से बच्चों के साथ खेलने में रम गए।
इस पहेली में हल हेतु कोई संकेत नहीं,
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
रविवार, 30 दिसंबर 2012
पहेली संख्या १०३ का परिणाम और विजेता अरुण शर्मा 'अनंत 'जी
सम्मानित चिट्ठाकारों ,
पहेली संख्या १०३ के विजेता हैं -
जिनका उत्तर विकिपीडिया से मुंशी प्रेम चंद जी के कहानी संग्रह ''सोजे वतन ''के विषय में दिया गए गद्यांश से पूरी तरह से मिलता है .
अरुण जी आपको हिंदी साहित्य पहेली १०३ के विजेता बानने पर बहुत बहुत बधाई व् नव वर्ष २०१३ की हिंदी साहित्य पहेली परिवार की ओर से बहुत बहुत शुभकामनायें
शालिनी कौशिक
पहेली संख्या १०३ के विजेता हैं -
| ''अरुण शर्मा 'अनंत 'जी , |
जिनका उत्तर विकिपीडिया से मुंशी प्रेम चंद जी के कहानी संग्रह ''सोजे वतन ''के विषय में दिया गए गद्यांश से पूरी तरह से मिलता है .
सोज़े वतन नामक कहनी संग्रह के रचनाकार नवाबराय (प्रेमचन्द) हैं। इसका प्रकाशन १९०८ में हुआ। इस संग्रह के कारण प्रेमचन्द को सरकार का कोपभाजन बनना पडा। सोज़े वतन का अर्थ है देश का मातम। इस संग्रह
में पाँच कहानियाँ थीं। दुनिया का सबसे
अनमोल रतन, शेख मखमूर, यही मेरा वतन है,शोक का पुरस्कार, और सांसारिक प्रेम। पाँचों कहानियाँ उर्दू भाषा में थीं। हमीरपुर के जिला कलेक्टर ने इसे देशद्रोही करार दिया और इसकी सारी प्रतियाँ जलवाकर
नष्ट कर दीं। इसके बाद नवाबराय से वे प्रेमचन्द हो गए।
शालिनी कौशिक
गुरुवार, 20 दिसंबर 2012
हिंदी साहित्य पहेली -१०३
सोज़े-वतन
1-दुनिया के सबसे अनमोल रत्न
2-उर्दू भाषा में थीं
3- प्रेमचन्द
4-नवाबराय से वे प्रेमचंद
5- प्रेमचन्द
उपरोक्त रिक्त स्थानों में निम्न संकेत शब्दों का स्थान बताएं और हिंदी साहित्य पहेली -103 के विजेता बनें .
शालिनी कौशिक
सोमवार, 15 अक्टूबर 2012
असुविधा के लिये खेद है
आंखों के इन्फेक्शन के चलते डाक्टर द्वारा कम्पूटर स्क्रीन से दूर रहने सख्त हिदायत दी गयी है इसलिये आज की पहेली दो दिन बाद 17 अक्टूबर दिन बुधवार को पूछी जायेगी ।
बुधवार, 10 अक्टूबर 2012
हिन्दी साहित्य पहेली 102 के परिणाम
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
हिन्दी साहित्य पहेली 102 का सही उत्तर है खलील जिब्रान
और इस पहेली के विजेता हैं ...
हिन्दी साहित्य पहेली 102 में 10 अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागी हैं।
1आदरणीय सुश्री ऋताशेखर मधु जी जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 20)
2आदरणीय श्री "अनंत" अरुन शर्मा जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 20)
3आदरणीया सुश्री साधना वैद्य जी(माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 10)
4आदरणीय श्री प्रकाश गोविन्द जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 20)
5आदरणीय श्री सिद्धेश्वर सिंह जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 10)
और हिन्दी साहित्य पहेली 102 में 5 अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागी हैं।
1आदरणीय श्री रविकर जी (माह अक्टूबर के विजेता हेतु अब तक कुल अंक 10)
मासिक विजेता निर्धारण के नये प्रारूप के प्रथम विजेता प्रत्याशियों को आगामी पहेलियों के लिये अग्रिम हिंदी साहित्य पहेली परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनायें
मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012
हिंदी साहित्य पहेली 102 कहानी के लेखक को पहचानना है
लेबनान के महाकवि एवं महान दार्शनिक के साहित्य–संसार को मुख्य रूप से दो प्रकारों में रखा जा सकता है, एक : जीवन–विषयक गम्भीर चिन्तनपरक लेखन, दो : गद्यकाव्य, उपन्यास, रूपककथाएँ आदि।
मानव एवं पशु–पक्षियों के उदाहरण लेकर मनुष्य जीवन का कोई तत्त्व स्पष्ट करने या कहने के लिए रूपककथा, प्रतीककथा अथवा नीतिकथा का माध्यम हमारे भारतीय पाठकों व लेखकों के लिए नया नहीं है।
इस लेखक की लिखी एक लघु कथा इस प्रकार हे जिसके आधार पर आपको इसे पहचानाना है
मानव एवं पशु–पक्षियों के उदाहरण लेकर मनुष्य जीवन का कोई तत्त्व स्पष्ट करने या कहने के लिए रूपककथा, प्रतीककथा अथवा नीतिकथा का माध्यम हमारे भारतीय पाठकों व लेखकों के लिए नया नहीं है।
इस लेखक की लिखी एक लघु कथा इस प्रकार हे जिसके आधार पर आपको इसे पहचानाना है
एक हजार वर्ष पहले की बात है, लेबनान की एक ढलान पर दो दार्शनिक आकर मिले । एक ने दूसरे से पूछा, “तुम कहाँ जा रहे हो ?”
दूसरे ने उत्तर दिया, “मैं एक यौवन के झरने की तलाश में जा रहा हूँ । मुझे लगता है कि उसका स्त्रोत इन्हीं पहाड़ियों के बीच कहीं है । मुझे कुछ ऐसे लिखित प्रमाण मिले हैं, जो उसका उद्गम पूर्व की ओर बताते हैं । तुम क्या खोज रहे हो ?”
पहले व्यक्ति ने उत्तर दिया, “मैं मृत्यु के रहस्य की तलाश में हूँ ।”
फिर दोनों दार्शनिकों ने एक-दूसरे के प्रति यह धारणा बना ली कि दूसरे के पास उसके समान महान विद्या नहीं है । वे आपस में बहस करने लगे और एक-दूसरे पर अंधविश्वासी होने का आरोप लगाने लगे ।
दोनों दार्शनिकों के शोर से सारा वातारवरण गूँज उठा । तभी एक अजनबी उधर आ निकला, जो अपने गाँव में महामूर्ख समझा जाता था । जब उसने दोनों को उत्तेजनापूर्ण बहस करते हुए देखा, तो वह थोड़ी देर तक खड़ा उनके तर्कों को सुनता रहा ।
उसके बाद वह उनके निकट आकर बोला, “सज्जनो, ऐसा लगता है कि तुम दोनों वास्तव में एक ही सिद्धात के माननेवाले हो और एक ही बात कह रहे हो । अंतर केवल शब्दों का है । तुममें से एक यौवन के झरने की तलाश कर रहा है और दूसरा मृत्यु के रहस्य को पाना चाहता है । हैं तो दोनों एक ही , परंतु अलग-अलग रुप में तुम्हारे दिमाग में घूमते है ।”
फिर वह अपरिचित यह कहते हुए मुड़ा, “अलविदा संतो !” और वह हँसते हुए वहाँ से चला गया ।
फिर उन में से एक ने कहा, “अच्छा, तो क्यों न अब हम दोनों मिलकर खोज करें ?”
सोमवार, 8 अक्टूबर 2012
असुविधा के लिये खेद है
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
असुविधा के लिये खेद है कुछ अपरिहार्य कारणों इस बार की पहेली आज निर्धारित समय से नहीं पूछी जा सकी है इस बार की पहेली मंगलवार को निर्धारित समय पर पूछी जायेगी असुविधा के लिये खेद है
मंगलवार, 2 अक्टूबर 2012
हिन्दी साहित्य पहेली 101 के परिणाम
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
हिन्दी साहित्य पहेली 101 का सही उत्तर है
और इस पहेली के विजेता हैं ...
अरे ठहरिये.. ..
इस बार विजेता की घोषणा से पहले कुछ चर्चा
आपसे प्राप्त सुझावों पर
अरे ठहरिये.. ..
इस बार विजेता की घोषणा से पहले कुछ चर्चा
आपसे प्राप्त सुझावों पर
हिन्दी साहित्य पहेली हेतु अब भी सुझाव आमंत्रित हैं ।
अब तक प्राप्त सुझावों में सुश्री ऋताशेखर मधु जी ने इन्टरनेट की सुचारू उपलब्धता के प्रश्न को उठाकर पहेली का उत्तर सबसे पहले देने वाले को ही विजेता मानने की प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता जतायी है । इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करते हुये पहेली का उत्तर देने हेतु समय की सीमा समाप्त करते हुये अब पहेली जारी होने से परिणाम घोषित होने तक प्राप्त सभी सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को समान योग्यतांक दिये जायेंगे । इसके अतिरिक्त यदि आपका उत्तर सही न हो तो भी प्रयास करने के लिये प्रत्येक प्रतिभागी को सांत्वना योग्यतांक दिये जायेगे और प्रत्येक माह की समाप्ति पर उस माह सर्वाधिक योग्यतांक अर्जित करने वाले प्रतिभागी को विजेता घोषित किया जायेगा।
इस प्रकार पहेली का उत्तर देने वाले प्रतिभागियों की निम्न दो श्रेणियां होंगी
1.पहेली प्रकाशित होने के 24 घंटे के भीतर सही उत्तर देने वाले सभी प्रतिभागियों को योग्यतांक 10 (दस) प्राप्त होगे।
2.तथा इस अवधि में प्रतिभाग कर प्रयास करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को सांत्वना योग्यतांक 5 (पांच), प्राप्त होगे ।
हिन्दी साहित्य पहेली 101 में 10 अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागी हैं।
1आदरणीय श्री "अनंत" अरुन शर्मा जी
2आदरणीय श्री प्रकाश गोविन्द जी
3आदरणीया सुश्री ऋता शेखर मधु जी
और हिन्दी साहित्य पहेली 101 में 5 अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागी हैं।
1आदरणीय श्री अजीज जौनपुरी जी
2आदरणीया सुश्री मनु त्यागी जी
मासिक विजेता निर्धारण के नये प्रारूप के प्रथम विजेता प्रत्याशियों को आगामी पहेलियों के लिये अग्रिम शुभकामनाए
सोमवार, 1 अक्टूबर 2012
हिन्दी साहित्य की पहेली 101 कृति को पहचानो
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
संकेत के रूप में बताना चाहेंगे कि इन पंक्तियों की रचयिता अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रचनाकार है और मूल रूप से भारत की निवासिनी नहीं है
संकेत के बाद अब तक तो आप पहचान ही गये होंगे इस अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक को ।
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
समाजिक जागरूकता के अनेक दावों के बावजूद हमारे भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की ही है उनका बचपन बस हिदायतों के साथ ही बढता है ऐसा ही कुछ नीचे लिखी इन पंक्तियों से भी परिलक्षित होता है परन्तु हमें यह नहीं मालूम कि कविता की ये पंक्तियां किस रचनाकार की हैं और उस रचनाकार ने किस देश में बिताये अपने बचपन को इन पंक्तियों में उतारने का प्रयास किया है? इसे पहचानना ही आज की साहित्य पहेली को हल करना है
कविता की पंक्तियां
संकेत के रूप में बताना चाहेंगे कि इन पंक्तियों की रचयिता अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रचनाकार है और मूल रूप से भारत की निवासिनी नहीं है
संकेत के बाद अब तक तो आप पहचान ही गये होंगे इस अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक को ।
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
शनिवार, 29 सितंबर 2012
सम्मानित पाठकजनों की राय प्रतीक्षित
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
हिन्दी साहित्य की 101 वीं पहेली जारी होने में अब मात्र 36 घंटे ही बाकी है परन्तु पहेली के नियमों में बदलाव विषयक निम्न प्रस्ताव पर आप सभी सम्मानित पाठकजनों की राय अब तक अप्राप्त है
''प्रत्येक पहेली में सभी सुधी प्रतिभागियों को विजेता, उपविजेता तथा प्रतिभागकर्ता के रूप में पृथक पृथक योग्यतांक दिये जायें और इन योग्यतांकों को हर पहेली के परिणाम के उपरांत प्रतिभागी द्वारा अर्जित योग्यतांकों को जोड दिया जाये ।
एक निश्चित योग्यतांक अर्जित करने के बाद प्रत्येक प्रतिभागी हिन्दी साहित्य पहेली की ओर से विशेष रूप से पुरस्कृत किये जाने हेतु पात्र हों......... ''
फिलहाल इस प्रस्ताव के संबंध में सुझाव आमंत्रित हैं कि विजेता, उपविजेता तथा प्रतिभागकर्ता को कितने कितने योग्यतांक दिये जाने चाहिऐ. आप सभी प्रतिभागियों का मंतव्य इस पहेली के भविष्य निर्धारण हेतु आवश्यक हैं.अतः भी आप सभी सुधी पाठकजनों से अनुरोध है कि कृपया इस प्रस्ताव के संबंध में अपनी राय हिन्दी साहित्य की 101 वीं पहेली जारी होने से पहले टिप्पणी के रूप में अवश्य अंकित करें
आप अपनी टिप्पणी व्लाग 'अंतरजाल साहित्य योगदानकर्ता मंचपर भी अंकित कर सकते हैं
गुरुवार, 27 सितंबर 2012
हिन्दी साहित्य पहेलीः 100 परिणाम की घोषणा
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
शतकीय पहेली के विजेता श्री दर्शन लाल बावेजा जी को हार्दिक बधाई

इस शतकीय पहेली को नयी रूप सज्जा के साथ प्रस्तुत करने के दौरान इस व्लाग में मेरे द्वारा अनजाने कुछ ऐसी त्रुटि हो गयी थी जिसके चलते इस व्लाग पर पाठकों की टिप्पणी का कालम हाइलाइट नहीं हो रहा था जो संभवतः इस टेपम्लेट में अब दूर हो गयी हैं असुविधा के लिये खेद है
इस बार की पहेली में पूछे गये प्रश्नों के सही उत्तर इस प्रकार हैं
प्रश्न 1.हिन्दी साहित्य पहेली का प्रथम विजेता कौन था?उत्तर: डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) जी
प्रश्न 2.हिन्दी साहित्य पहेली के उस पहले विजेता का नाम बताऐं जो इसकी अर्धशतकीय पहेली (50वीं पहेली) आने तक कभी विजेता अथवा उपविजेता नहीं रहे ?उत्तर: हिन्दी साहित्य पहेली 54 विजेता श्री केवल राम जी
प्रश्न 3.एक ऐसी हिन्दी साहित्य पहेली भी पूछी गयी थी जिसके जारी होने से उसके विजेताओं की घोषणा होने तक पहेली में सम्मिलित साहित्यकार को सर्वोच्च हिन्दी सम्मान से सम्मानित किया गया था, आपको इस पहेली को पहचान कर इसके विजेता का नाम बताना है?उत्तर:हिन्दी साहित्य पहेली 47 जिस महान हस्ती पर आधारित थी उन आदरणीय श्रीलाल जी शुक्ल को वर्ष 2009 का भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया है जो 20 सितम्बर 2011 को घोषित हुआ है हिंदी साहित्य पहेली 47 के विजेता है श्री दर्शन लाल बावेजा जी
प्रश्न 4.कौन सी हिन्दी साहित्य पहेली में पूछा गया प्रश्न पहेली संख्या 1 में पूछे गये प्रश्न की पुनरावृति था?उत्तर: हिन्दी साहित्य पहेली 85 हिन्दी की पहली आत्मकथा का लेखक कौन है?
सबसे पहले सही उत्तर भेज कर इस शतकीय पहेली के विजेता हैं श्री दर्शन लाल बावेजा जी

इसके अतिरिक्त हिन्दी साहित्य पहेली के नियमों में बदलाव हेतु आप सभी पाठकजनों की अमूल्य राय आमंत्रित है कि प्रत्येक पहेली में सभी सुधी प्रतिभागियों को विजेता, उपविजेता तथा प्रतिभागकर्ता के रूप में पृथक पृथक योग्यतांक दिये जायें और इन योग्यतांकों को हर पहेली के परिणाम के उपरांत प्रतिभागी द्वारा अर्जित योग्यतांकों को जोड दिया जाये ।
एक निश्चित योग्यतांक अर्जित करने के बाद प्रत्येक प्रतिभागी हिन्दी साहित्य पहेली की ओर से विशेष रूप से पुरस्कृत किये जाने हेतु पात्र हों......... विस्तृत नियमों की चर्चा करते हुये फिलहाल इस प्रस्ताव के संबंध में सुझाव आमंत्रित हैं कि विजेता, उपविजेता तथा प्रतिभागकर्ता को कितने कितने योग्यतांक दिये जाने चाहिऐ. आप सभी प्रतिभागियों का मंतव्य इस पहेली के भविष्य निर्धारण हेतु आवश्यक हैं.अतः भी आप सभी सुधी पाठकजनों से अनुरोध है कि कृपया इस प्रस्ताव के संबंध में अपनी टिप्पणी अवश्य अंकित करें
आप अपनी टिप्पणी व्लाग 'अंतरजाल साहित्य योगदानकर्ता मंच 'पर भी अंकित कर सकते हैं
बुधवार, 26 सितंबर 2012
हिन्दी साहित्य पहेलीः 100 परिणाम की घोषणा से पहले हमारे विजेताओं से मिलें
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
एक निश्चित योग्यतांक अंकित करने के बाद प्रत्येक प्रतिभागी हिन्दी साहित्य पहेली की ओर से विशेष रूप से पुरस्कृत किये जाने हेतु पात्र हों......... फिलहाल इस प्रस्ताव के संबंध में आप सभी प्रतिभागियों का मंतव्य आमंत्रित है
हिन्दी साहित्य पहेली 100 को जारी हुये 60 घंटे पूरे हो चुके हैं परन्तु अभी तक समुचित सही उत्तर प्राप्त नहीं होने से परिणाम की घोषणा नहीं की जा सकी है। अतः अब भी आपके पास उत्तर देने के लिये पर्याप्त अवसर है क्योंकि अपने सम्मानित प्रतिभागी और अनेक पहेलियों के विजेता आदरणीय श्री दर्शन लाल बावेजा जी के द्वारा दिये गये सुझाव को गंभीरता से लेते हुये के इस शतकीय पहेली के उपरांत हिन्दी साहित्य पहेली के नियमें में कुछ ऐसे बदलाव किये जाने का प्रस्ताव हैं जिसके आधार पर प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जा सकेगा।
विस्तृत नियमों की चर्चा पुनः की जायेगी
फिलहाल इस संबंध में व्लाग के एक व्यवस्थापक के रूप में मेरा यह प्रस्ताव है कि प्रत्येक पहेली में सभी सुधी प्रतिभागियों को विजेता, उपविजेता तथा प्रतिभागकर्ता के रूप में पृथक पृथक योग्यतांक दिये जायें और इन योग्यतांकों को हर पहेली के परिणाम के उपरांत प्रतिभागी द्वारा अर्जित योग्यतांकों को जोड दिया जाये ।
एक निश्चित योग्यतांक अंकित करने के बाद प्रत्येक प्रतिभागी हिन्दी साहित्य पहेली की ओर से विशेष रूप से पुरस्कृत किये जाने हेतु पात्र हों......... विस्तृत नियमों की चर्चा पुनः की जायेगी फिलहाल इस प्रस्ताव के संबंध में आप सभी प्रतिभागियों का मंतव्य भी आमंत्रित है
इस पहेली के परिणाम की घोषणा से पूर्व सभी पहेली के विजेता और उप विजेताओें का ब्यौरा गणना करने के बाद हमारे विजेताओं से मिलें पृष्ठ में आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है जिसके आधार पर परिणाम का आकलन किया जायेगा।
यह आंकडे इस उद्देश्य से जारी किये जा रहे है कि आप सभी सुधी पाठक जन कृपया इन्हें भली भांति देख ले और इनकी तुलना भी कर लें यदि इसमें कोई त्रुटि पाते हैं तो कृपया अपनी आपत्ति की टिप्पणी अवश्य प्रेषित करे ताकि त्रुटि का निराकरण करते हुये उसके आधार पर परिणामो की घोषणा की जा सके ।
यदि आपकी कोई टिप्पणी नहीं प्राप्त होगी तो यह समझेंगे कि हमारी गणना सही है और इसी के आधार पर पहेली संख्या 100 का परिणाम घोषित कर दिया जायेगा। संकेत के बाद अब तक तो आप पहचान ही गये होंगे परिणामेां को ।
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ।
यह आंकडे इस उद्देश्य से जारी किये जा रहे है कि आप सभी सुधी पाठक जन कृपया इन्हें भली भांति देख ले और इनकी तुलना भी कर लें यदि इसमें कोई त्रुटि पाते हैं तो कृपया अपनी आपत्ति की टिप्पणी अवश्य प्रेषित करे ताकि त्रुटि का निराकरण करते हुये उसके आधार पर परिणामो की घोषणा की जा सके ।
यदि आपकी कोई टिप्पणी नहीं प्राप्त होगी तो यह समझेंगे कि हमारी गणना सही है और इसी के आधार पर पहेली संख्या 100 का परिणाम घोषित कर दिया जायेगा। संकेत के बाद अब तक तो आप पहचान ही गये होंगे परिणामेां को ।
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ।
एक निश्चित योग्यतांक अंकित करने के बाद प्रत्येक प्रतिभागी हिन्दी साहित्य पहेली की ओर से विशेष रूप से पुरस्कृत किये जाने हेतु पात्र हों......... फिलहाल इस प्रस्ताव के संबंध में आप सभी प्रतिभागियों का मंतव्य आमंत्रित है
मंगलवार, 25 सितंबर 2012
हिन्दी साहित्य पहेलीः 100 हल हेतु एक संकेत
प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,
शुभकामनाओं सहित
हिन्दी साहित्य पहेली 100 को घोषित हुये 24 घंट हो चुके हें परन्तु अब तक किसी विजेता का सही उत्तर नहीं प्राप्त हुआ है अतः इसके हल हेतु संकेत दिया जा रहा है
संकेत- हमारे विजेताओं से मिलो पेज पर इस साहित्य पहेली की 50 पहेलियेां का संकलित व्यौरा अंकित है उसमे प्रश्न संख्या 1 का हल छिपा है
प्रश्न संख्या 2 का हल पहेली संख्या 51 से 60 के बीच की पहेलियेां के परिणामेां में छिपा है
प्रश्न संख्या 3 का हल पहेली संख्या 41 से 50 के बीच की पहेलियेां के परिणामेां में छिपा है
प्रश्न संख्या 4 का हल पहेली संख्या 81 से 90 के बीच की पहेलियेां के परिणामेां में छिपा है
संकेत के बाद अब तक तो आप पहचान ही गये होंगे परिणामेां को ।
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित
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