मंगलवार, 29 अक्टूबर 2013

हिन्दी साहित्य पहेली 106 के परिणाम विजेता सुश्री शारदा सुमन जी

प्रिय पाठकजन एवं चिट्ठाकारों,


इस पहेली का परिणाम

हिंदी साहित्य पहेली 106 विश्व प्रसिद्ध पत्र के लेखक को पहचानना था 


यह ऐतिहासिक पत्र जवाहर लाल नेहरू ने अंग्रेजी भाषा में अपनी पुत्री इन्दिरा जी को लिखे थे जिनका हिन्दी अनुवाद प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रेमचंद ने किया था।



जवाहर लाल नेहरू से संबंधित अन्य जानकारी गद्यकोश पर  




इस पहेली के कई उत्तर हमें प्राप्त हुये जो सही थे सबसे पहले प्राप्त होने वाला उत्तर  सुश्री शारदा सुमन  जी  जी का रहा अतः आज के विजेता पद को सुशोभित करने का अधिकार जाता है सुश्री शारदा सुमन  जी को ।

 और अब चर्चा इस पहेली के परिणाम पर


1-इस बार सही उत्तर भेजकर विजेता बनी हैं सुश्री शारदा सुमन  जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)


2- और आज की पहेली में सही उत्तर भेजकर उपविजेता हैं श्री सुनील झा  जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)


3- और आज की पहेली में सही उत्तर भेजकर उपविजेता हैं श्री  प्रकाश गोविन्द जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)
4-इस बार सही उत्तर भेजकर विजेता बनी हैं सुश्री  साधना वैद्य जी (इस पहेली के लिये 10 अंक)

आज की पहेली का सही उत्तर खोज कर साहित्य पहेली को प्रेषित कर इसमें सक्रिय भाग लेने के लिये हार्दिक आभार और शुभकामनाये


एक विशेष  बात


पहेली के नये नियमों के अधीन इस बार विजेता नये सिरे से घोषित किया जायेगा । माह अक्टूबर 2013 में पूछी गयी सभी पहेलियों के आधार पर मासिक विजेता का परिणाम जानने के लिये दिनांक 10 नवम्बर 2013 को हिन्दी साहित्य पहेली पढना मत भूलियेगा  



सोमवार, 28 अक्टूबर 2013

हिंदी साहित्य पहेली 106 विश्व प्रसिद्ध पत्र के लेखक को पहचानना है

प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकार मित्रों,

निम्न पंक्तियां लिखने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति  का नाम  लिये बगैर स्वतंत्र भारत के इतिहास की कल्पना ही नहीं की जा सकती।

............तुम इतिहास किताबों में ही पढ़ सकती हो। लेकिन पुराने जमाने में तो आदमी पैदा ही न हुआ था; किताबें कौन लिखता? तब हमें उस जमाने की बातें कैसे मालूम हों? यह तो नहीं हो सकता कि हम बैठे-बैठे हर एक बात सोच निकालें। यह बड़े मजे की बात होती, क्योंकि हम जो चीज चाहते सोच लेते, और सुंदर परियों की कहानियाँ गढ़ लेते। लेकिन जो कहानी किसी बात को देखे बिना ही गढ़ ली जाए वह ठीक कैसे हो सकती है? लेकिन खुशी की बात है कि उस पुराने जमाने की लिखी हुई किताबें न होने पर भी कुछ ऐसी चीजें हैं जिनसे हमें उतनी ही बातें मालूम होती हैं जितनी किसी किताब से होतीं। ये पहाड़, समुद्र, सितारे, नदियाँ, जंगल, जानवरों की पुरानी हड्डियाँ और इसी तरह की और भी कितनी ही चीजें हैं जिनसे हमें दुनिया का पुराना हाल मालूम हो सकता है। मगर हाल जानने का असली तरीका यह नहीं है कि हम केवल दूसरों की लिखी हुई किताबें पढ़ लें, बल्कि खुद संसार-रूपी पुस्तक को पढ़ें। मुझे आशा है कि पत्थरों और पहाड़ों को पढ़ कर तुम थोड़े ही दिनों में उनका हाल जानना सीख जाओगी। सोचो, कितनी मजे की बात है। एक छोटा-सा रोड़ा जिसे तुम सड़क पर या पहाड़ के नीचे पड़ा हुआ देखती हो, शायद संसार की पुस्तक का छोटा-सा पृष्ठ हो, शायद उससे तुम्हें कोई नई बात मालूम हो जाय। शर्त यही है कि तुम्हें उसे पढ़ना आता हो। कोई जबान, उर्दू, हिंदी या अंग्रेजी, सीखने के लिए तुम्हें उसके अक्षर सीखने होते हैं। इसी तरह पहले तुम्हें प्रकृति के अक्षर पढ़ने पड़ेंगे, तभी तुम उसकी कहानी उसकी पत्थरों और चट्टानों की किताब से पढ़ सकोगी। शायद अब भी तुम उसे थोड़ा-थोड़ा पढ़ना जानती हो। जब तुम कोई छोटा-सा गोल चमकीला रोड़ा देखती हो, तो क्या वह तुम्हें कुछ नहीं बतलाता? यह कैसे गोल, चिकना और चमकीला हो गया और उसके खुरदरे किनारे या कोने क्या हुए? अगर तुम किसी बड़ी चट्टान को तोड़ कर टुकड़े-टुकड़े कर डालो तो हर एक टुकड़ा खुरदरा और नोकीला होगा। यह गोल चिकने रोड़े की तरह बिल्कुल नहीं होता। फिर यह रोड़ा कैसे इतना चमकीला, चिकना और गोल हो गया? अगर तुम्हारी ऑंखें देखें और कान सुनें तो तुम उसी के मुँह से उसकी कहानी सुन सकती हो। वह तुमसे कहेगा कि एक समय, जिसे शायद बहुत दिन गुजरे हों, वह भी एक चट्टान का टुकड़ा था। ठीक उसी टुकड़े की तरह, उसमें किनारे और कोने थे, जिसे तुम बड़ी चट्टान से तोड़ती हो। शायद वह किसी पहाड़ के दामन में पड़ा रहा। तब पानी आया और उसे बहा कर छोटी घाटी तक ले गया। वहाँ से एक पहाड़ी नाले ने ढकेल कर उसे एक छोटे-से दरिया में पहुँचा दिया। इस छोटे से दरिया से वह बड़े दरिया में पहुँचा। इस बीच वह दरिया के पेंदे में लुढ़कता रहा, उसके किनारे घिस गए और वह चिकना और चमकदार हो गया। इस तरह वह कंकड़ बना जो तुम्हारे सामने है। किसी वजह से दरिया उसे छोड़ गया और तुम उसे पा गईं। अगर दरिया उसे और आगे ले जाता तो वह छोटा होते-होते अंत में बालू का एक जर्रा हो जाता और समुद्र के किनारे अपने भाइयों से जा मिलता, जहाँ एक सुंदर बालू का किनारा बन जाता, जिस पर छोटे-छोटे बच्चे खेलते और बालू के घरौंदे बनाते।
अगर एक छोटा-सा रोड़ा तुम्हें इतनी बातें बता सकता है, तो पहाड़ों और दूसरी चीजों से, जो हमारे चारों तरफ हैं, हमें और कितनी बातें मालूम हो सकती हैं।........



इस पहेली में हल हेतु कोई संकेत नहीं,
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।

शुभकामनाओं सहित