सोमवार, 14 मई 2012

हिन्दी साहित्य पहेली 81 साहित्यकार को पहचानों


प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,

आज की साहित्य पहेली जलियांवाला बाग पर आधारित है याद करिये 13 अप्रैल 1919 का वह काला दिन जब अमृतसर के जलियांवाला बाग में शान्तिर्पूएा निहत्थी जनता पर अंग्रजी जनरल डायर ने गोलियां चलवायीं थीं ।
इस घटना का समूचे भारतवर्ष में विरोध हुआ और तत्कालीन साहित्कारों ने भी अपने अपने तरीके से विरोध जताया । तत्कालीन एक जाने माने साहित्यकार द्वारा इस घटना की कठोर निंदा करते हुये अंग्रेजी हुकूमत के वायसराय को एक शालीन सा पत्र लिखा और इस पत्र के साथ अंग्रजी हुकूमत द्वारा उन्हें दी गयी ‘नाइटहुड’ की उपाधि को भी प्रतिकार स्वरूप वापिस लौटा दिया गया।
आज की पहेली में आपको इस महान साहित्यकार को पहचानना है
संकेत के रूप में इस महान साहित्कार के द्वारा अपने जन्मदिन पर लिखी कविता की कुछ पंक्तियां प्रस्तुत हैं

उतार लेना सारे अलंकार एक-एक कर,

वर्ण सज्जाहीन अंगरखे से ढक देना,

माथे पर बना देना शुभ्र तिलक की रेखा,

तुम लोग भी शामिल होना

जीवन का भरा घट लेकर,

उस अंतिम अनुष्ठान में ,


हो सकता है सुनो दूर से ,

दिगंत के उस पार से शंख की मंगल ध्वनि.............


और जैसा उन्होने इस कविता ‘जन्मदिन’ में लिखा था ठीक उसी के अनुरूप एक अभागी 7 अगस्त को इस महान साहित्यकार के निधन के तुरंत बाद उनकी देह को नई सफेद धोती और अंगरखा पहना दिया गया माथे पर सफेद चंदन का टीका लगाया गया और कंठ में रजनीगंधा की माला पहनायी गयी।

आज की पहेली में आपको इस साहित्कार का नाम बताना है।
इतने संकेतों के बाद अब तक तो आप पहचान ही गये होंगे इस महान साहित्यकार को । तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।
शुभकामनाओं सहित

1 टिप्पणी:

  1. इस महान विभूति एवं जाने माने साहित्यकार का नाम है ----
    रवीन्द्रनाथ ठाकुर !

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