सोमवार, 25 जून 2012

हिन्दी साहित्य पहेली 87 इस साहित्यकार को पहचानना है?

प्रिय पाठकजन एवं चिट्ठाकारों


आज की साहित्य पहेली हिन्दी के ऐसे साहित्कार से संबंधित है जिसे ईश्वर ने लंबी आयु नहीं दी परन्तु इसके बावजूद हिन्दी साहित्य को दी गयी दी गयी इनकी धरोहर अनमोल है। इस रचनाकार के संबंध में कुछ जानकारी दी जा रही है जिसके आधार पर आपको इस साहित्यकार को पहचानना है

जयपुर के राजपण्डित के कुल में जन्म लेनेवाले इस रचनाकार का राजवंशों से घनिष्ठ सम्बन्ध रहा। वे पहले खेतड़ी नरेश जयसिंह के और फिर जयपुर राज्य के सामन्त-पुत्रों के अजमेर के मेयो कॉलेज में अध्ययन के दौरान उनके अभिभावक रहे। सन् 1916 में उन्होंने मेयो कॉलेज में ही संस्कृत विभाग के अध्यक्ष का पद सँभाला। सन् 1920 में पं. मदन मोहन मालवीय के प्रबंध आग्रह के कारण उन्होंने बनारस आकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राच्यविद्या विभाग के प्राचार्य और फिर 1922 में प्राचीन इतिहास और धर्म से सम्बद्ध मनीन्द्र चन्द्र नन्दी पीठ के प्रोफेसर का कार्यभार भी ग्रहण किया। इस बीच परिवार में अनेक दुखद घटनाओं के आघात भी उन्हें झेलने पड़े। सन् 1922 में 12 सितम्बर को पीलिया के बाद तेज़ बुख़ार से मात्र 39 वर्ष की आयु में उनका देहावसान हो गया।


क्या आप पहचान गये हैं उस रचनाकार को? तो फिर देर किस बात की तो फिर अब देरी किस बात की जल्दी से जल्दी अपना उत्तर भेजें ताकि आपसे पहले उत्तर भेजकर कोई और इसका पहेली का विजेता न बन जाय।

हार्दिक शुभकामनाओं सहित।

2 टिप्‍पणियां:

  1. श्रीयुत चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' जी

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  2. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी!
    मेरा उत्तर सही हैं क्या?
    100 प्रतिशत सही ही होगा!

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