सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

हिन्दी साहित्य पहेली 70 इस प्रसिद्ध कवि को पहचानो

प्रिय पाठकजन एवं चिट्ठाकारों
सामने प्रकाशित चित्र पर्वतीय क्षेत्रों में खिलने वाले पुष्प बुरांस का है । इस पुष्प बुरांस से जुडी अनेक अनेक स्थानीय लोककथाये पर्वतीय जनमानस में गूंजती रहती है यह एक चिकित्सिीय गुणों से भरपूर पुष्प (बुरांस medicinal plant) है

आज की पहेली में हिन्दी के एक महान प्रसिद्ध कवि के द्वारा क्षेत्रीय कुमांउनी भाषा में लिखी चार पंक्तियां प्रस्तुत है जिनमें प्रकृति के इस चितेरे इस कवि ने अपने काव्य की मूल विशेषता के अनुरूप ही आचरण किया है और पर्वतीय क्षेत्रों में पाये जाने वाले पुष्प बुरांस को संबोधित किया है
इन पंक्तियो के आधार पर ही आज आपको इस कवि को पहचानना है। पंक्तियां है

सार जंगल में तवी ज क्वे नहाँ रे क्वे नहाँ
फूलन छे के बुरूंशु जंगल जस जली जाँ
सल्ल छ दयार छ छ पई छ अंयार छ
सबनाक फागन में पुग्नक भार छ
पे त्वी में ज्वानिक फाग छ
रगन में तैयार ल्वै छ, प्यारक खुमार छ,


और इन पक्तियों का भावार्थ है
शब्दार्थः सारे जंगल में तेरे जैसा कोई नहीं रे कोई नहीं फूलों से कहा बुरांस जंगल जैसे जल जाता है । सल्ल है देवदार है पइंया है अयांर है (यह सब पेडों की विभिन्न किस्में है) सबके फाग में पीठ का भार है फिर तुझमें जवानी का फाग है।रगों में तेरे लौ है प्यार का खुमार है।
संकेत के रूप इस महाकवि के नीचे अंकित हस्ताक्षर प्रस्तुत हैं जो इस महाकवि ने अपने मित्र को लिखे एक पोस्ट कार्ड पर अंकित किये थे।


क्या आप पहचान गये हैं उस कवि को तो फिर अब देरी किस बात की जल्दी से जल्दी अपना उत्तर भेजें ताकि आपसे पहले उत्तर भेजकर कोई और इसका पहेली का विजेता न बन जाय।

हार्दिक शुभकामनाओं सहित।

6 टिप्‍पणियां:

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