सोमवार, 16 जनवरी 2012

हिन्दी साहित्य पहेली 64 पत्रिका को पहचानो

हिन्दी साहित्य पहेली 63 के संबंध में आदरणीय डा0 रूपचंद जी शास्त्री मयंक जी का यह प्रेक्षण (आव्जरवेशन) रहा है कि इतनी आसान पहेली नहीं पूछनी चाहिये सो आदरणीय शास्त्री मयंक जी के निर्देशों का अनुसरण करते हुये अपेक्षाकृत कुछ कठिन प्रश्न पूछा जा रहा है देखना है कि आप में से कौन सबसे पहले इस प्रश्न का उत्तर भांप कर भेजता है।
बीसवीं शताब्दी में हिन्दी साहित्यिक पत्रकारिता के दस शिखरों में स्थान पाने वाली इस साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन 1920 में प्रारंभ हुआ था और यह पत्रिका 1928 तक लगातार प्रकाशित होती रही आपको इस पत्रिका को पहचानना है।


पहले संकेत के रूप में बताना चाहूंगा कि इस पत्रिका के सोलह विशेषांक प्रकाशित हुये ।

दूसरे संकेत के रूप में यह अवगत कराना चाहूंगा कि इस पत्रिका के प्रमुख लेखकों में श्री रामनेश त्रिपाठी, श्रीमती महादेवी वर्मा, श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान, तथा श्री सियाराम सरण गुप्त सम्मिलित थे।

तीसरे संकेत के रूप में यह अवगत कराना चाहूंगा कि इस पत्रिका के प्रमुख विशेषांको में विधवाअंक , अछूतांक, सती अंक , वेश्या अंक, तथा मारवाणी अंक विशेष चर्चित रहे है।

चौथे और अंतिम संकेत के रूप में यह अवगत कराना चाहूंगा कि इस पत्रिका के संपादक और इसकी संचालिका पति पत्नी थे जिनके नाम थे .......... नहीं....... नहीं नाम ...... का संकेत नहीं अन्यथा यह पहेली भी बहुत ही आसान हो जायेगी।


वैसे अब तक शायद आप पहचान गये होंगे इस पत्रिका को तो तो फिर देर किस बात की जल्दी से जल्दी अपना उत्तर भेजें ताकि आपसे पहले उत्तर भेजकर कोई और इसका पहेली का विजेता न बन जाय।


हार्दिक शुभकामनाओं सहित।

3 टिप्‍पणियां:

  1. मेरी समझ से तो इस पत्रिका का नाम "चाँद" होना चाहिए! क्योंकि "चाँद" का "मारवाणी अंक" बहुत लोकप्रिय हुआ था।

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  2. अपनी सुविधा से लिए, चर्चा के दो वार।
    चर्चा मंच सजाउँगा, मंगल और बुधवार।।
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. मेरे ख्याल से वह पत्रिका 'चाँद'है जिसका मारवाणी अंक चर्चित रहा था|

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आप सभी प्रतिभागियों की टिप्पणियां पहेली का परिणाम घोषित होने पर एक साथ प्रदर्शित की जायेगीं