मंगलवार, 9 अक्तूबर 2012

हिंदी साहित्य पहेली 102 कहानी के लेखक को पहचानना है

लेबनान के महाकवि एवं महान दार्शनिक के साहित्य–संसार को मुख्य रूप से दो प्रकारों में रखा जा सकता है, एक : जीवन–विषयक गम्भीर चिन्तनपरक लेखन, दो : गद्यकाव्य, उपन्यास, रूपककथाएँ आदि।
मानव एवं पशु–पक्षियों के उदाहरण लेकर मनुष्य जीवन का कोई तत्त्व स्पष्ट करने या कहने के लिए रूपककथा, प्रतीककथा अथवा नीतिकथा का माध्यम हमारे भारतीय पाठकों व लेखकों के लिए नया नहीं है।

इस लेखक की लिखी एक लघु कथा इस प्रकार हे जिसके आधार पर आपको इसे पहचानाना है


एक हजार वर्ष पहले की बात है, लेबनान की एक ढलान पर दो दार्शनिक आकर मिले । एक ने दूसरे से पूछा, “तुम कहाँ जा रहे हो ?”

दूसरे ने उत्तर दिया, “मैं एक यौवन के झरने की तलाश में जा रहा हूँ । मुझे लगता है कि उसका स्त्रोत इन्हीं पहाड़ियों के बीच कहीं है । मुझे कुछ ऐसे लिखित प्रमाण मिले हैं, जो उसका उद्गम पूर्व की ओर बताते हैं । तुम क्या खोज रहे हो ?”

पहले व्यक्ति ने उत्तर दिया, “मैं मृत्यु के रहस्य की तलाश में हूँ ।”

फिर दोनों दार्शनिकों ने एक-दूसरे के प्रति यह धारणा बना ली कि दूसरे के पास उसके समान महान विद्या नहीं है । वे आपस में बहस करने लगे और एक-दूसरे पर अंधविश्वासी होने का आरोप लगाने लगे ।

दोनों दार्शनिकों के शोर से सारा वातारवरण गूँज उठा । तभी एक अजनबी उधर आ निकला, जो अपने गाँव में महामूर्ख समझा जाता था । जब उसने दोनों को उत्तेजनापूर्ण बहस करते हुए देखा, तो वह थोड़ी देर तक खड़ा उनके तर्कों को सुनता रहा ।

उसके बाद वह उनके निकट आकर बोला, “सज्जनो, ऐसा लगता है कि तुम दोनों वास्तव में एक ही सिद्धात के माननेवाले हो और एक ही बात कह रहे हो । अंतर केवल शब्दों का है । तुममें से एक यौवन के झरने की तलाश कर रहा है और दूसरा मृत्यु के रहस्य को पाना चाहता है । हैं तो दोनों एक ही , परंतु अलग-अलग रुप में तुम्हारे दिमाग में घूमते है ।”

फिर वह अपरिचित यह कहते हुए मुड़ा, “अलविदा संतो !” और वह हँसते हुए वहाँ से चला गया ।

फिर उन में से एक ने कहा, “अच्छा, तो क्यों न अब हम दोनों मिलकर खोज करें ?”


8 टिप्‍पणियां:

  1. प्रस्तुत लघुकथा के लेखक हैं- ख़लील जिब्रान

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

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  4. मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि इसमे पहेली जैसा क्या है? जो व्यक्ति भी साहित्य में रुचि रखता हो , पढ़ता - लिखता हो उसके लिए खलील जिब्रान अजनबी कैसे हो सकते हैं!

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  5. ये लघुकथा श्री खलील जिब्रान जी ने लिखी है

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