सोमवार, 1 अक्तूबर 2012

हिन्दी साहित्य की पहेली 101 कृति को पहचानो

प्रिय पाठकगण तथा चिट्ठाकारों,


समाजिक जागरूकता के अनेक दावों के बावजूद हमारे भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की ही है उनका बचपन बस हिदायतों के साथ ही बढता है ऐसा ही कुछ नीचे लिखी इन पंक्तियों से भी परिलक्षित होता है परन्तु हमें यह नहीं मालूम कि कविता की ये पंक्तियां किस रचनाकार की हैं और उस रचनाकार ने किस देश में बिताये अपने बचपन को इन पंक्तियों में उतारने का प्रयास किया है? इसे पहचानना ही आज की साहित्य पहेली को हल करना है

कविता की पंक्तियां

संकेत के रूप में बताना चाहेंगे कि इन पंक्तियों की रचयिता अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रचनाकार है और मूल रूप से भारत की निवासिनी नहीं है

संकेत के बाद अब तक तो आप पहचान ही गये होंगे इस अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक को ।
तो फिर देर किस बात की तत्काल अपना उत्तर भेजें ताकि कोई और आपसे पहले पहेली का उत्तर भेजकर पहेली का विजेता न बन जाय।

शुभकामनाओं सहित

5 टिप्‍पणियां:

  1. यह पंक्तियाँ तसलीमा नसरीन के द्वारा लिखी गई हैं और वे बांग्लादेश में बिताये अपने बचपन को इन पंक्तियों में उतारने का प्रयास किया है

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  2. dukh to es bat ka hota hai ki "etni pabandion" ko hm yani ki "MAA" ayr "BAP" hi lagate hai aur bachpan se unke man aur mastishk me thoos- thoos kr es kadar bhar dete hai ki betio ka us makad jal se bahar nikal pana sambhv hi nhi ho pata,"KHUD B KHUD AA JAYEGI JALTI MASHALE HATH ME,AAP KUCH DER TO BAJU UTHA KR DEKHIYE"(Rashmi)

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  3. इन पंक्तियों की रचयिता हैं - तस्लीमा नसरीन जी

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